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भारत-चीन के बीच कई हफ्ते से जारी तनातनी में कुछ नरमी के संकेत दिखे हैं. चीनी सेना अब गलवान घाटी से 1-2 किमी. पीछे हट गई है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने रविवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से बात की थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच ये सहमति बनी है. भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद चल रहा है. इसे सुलझाने के लिए दोनों देशों की ओर से प्रतिनिधि तय किए गए हैं. भारत की ओर से अजित डोभाल ही स्थाई प्रतिनिधि हैं, जिनकी बात चीनी विदेश मंत्री से हुई है.

चीनी सेना अगर पीछे हटी है तो इसके पीछे भारत के कई रणनीतिक-राजनीतिक और राजनयिक कदम जिम्मेदार हैं जो पिछले कई दिनों से निरंतर आगे बढ़ाए जा रहे थे. सिलसिलेवार देखें तो इसमें कई अहम फैक्टर शामिल हैं, मसलन भारत ने कैसे बॉर्डर पर फौज बढ़ाई, फाइटर प्लेन तैयार किए, चीन के खिलाफ दुनिया भर में माहौल बना, अमेरिका सहित कई देशों के बयान आए, खुद प्रधानमंत्री लद्दाख गए. पहले आर्मी चीफ गए दूसरी तरफ वार्ता जारी रही. भरपूर उकसावे के बावजूद प्रधानमंत्री ने चीन का सीधा नाम नहीं लिया. इससे बातचीत की खिड़की खुली रही. कई ऐप बैन कर और चीनी कंपनियों के टेंडर निरस्त कर बताया कि भारत इस मामले में झुकेगा नहीं, नतीजा यह हुआ कि चीन को मामला आगे बढ़ाने में कोई फायदा नहीं दिखा.

पीएम का लद्दाख दौरा

अभी हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक सुबह में लद्दाख पहुंचे और सेना की हौसलाअफजाई की थी. लद्दाख से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन को कड़ा संदेश दिया था. उन्होंने कहा था कि जमाना विस्तारवादी नहीं, विकासवादी नीति का है. प्रधानमंत्री ने बिना चीन का नाम लिए निशाना साधा. उन्होंने कहा था, हम कृष्ण की बांसुरी और सुदर्शन चक्र दोनों को आदर्श मानते हैं. पीएम मोदी ने लद्दाख में घायल जवानों का भी हाल लिया था.

पीएम ने जवानों का हौसला बढ़ाया था. उन्होंने कहा था कि आपके शौर्य और साहस को पूरी दुनिया ने देखा है. इसके साथ ही लेह में पीएम मोदी ने LAC के हालातों पर जानकारी ली थी. प्रधानमंत्री मोदी CDS जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे के साथ लेह से आगे 11 हजार फीट की ऊंचाई वाले निमू तक गए. पीएम मोदी के दौरे का जो सार है वो राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की उन पंक्तियों में देखा गया जिन्हें खुद प्रधानमंत्री मोदी ने सुनाया.

चीन पर ऐप्स की बड़ी मार

चीन के साथ बिगड़े रिश्ते के मद्देनजर भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 59 चीनी ऐप्स पर बैन लगा दिया है. केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद जानकारों का मानना है कि इससे चीनी ऐप्स को संचालित करने वाली कंपनियों और खुद चीन को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है.

एक अंदाजे के मुताबिक अकेले टिकटॉक के बैन होने से ही कंपनी को 100 करोड़ रुपये की चपत लग सकती है. क्योंकि भारत में सिर्फ मार्च से मई 2020 के बीच 10 में से पांच सबसे ज़्यादा डाउनलोड होने वाली मोबाइल ऐप्स चीनी कंपनियों के ही हैं. इनमें टिकटॉक, जूम, Helo, Uvideo और यूसी ब्राउजर वो ऐप्स हैं, जिन्हें लाखों करोड़ों भारतीयों ने अपना रखा है. हालांकि इनमें से कुछ ऐप्स अभी भी इस लिस्ट में शामिल नहीं हैं.

आर्थिक मोर्चे पर झटका

चीन को भारत आर्थिक मोर्चे पर लगातार झटके दे रहा है. अब भारत सभी हाइवे प्रोजेक्ट्स में चीनी कंपनियों को बैन करने की तैयारी कर रहा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह जानकारी दी है. चीनी कंपनियों को संयुक्त उद्यम पार्टनर (JV) के रूप में भी काम नहीं करने दिया जाएगा. गौरतलब है कि इसके पहले रेलवे के कई ठेकों से चीनी कंपनियों को बाहर कर दिया गया था. गौरतलब है कि फिलहाल देश के कुछ इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में चीनी कंपनियां साझेदार के रूप में काम कर रही हैं. गडकरी ने कहा है कि नया निर्णय मौजूदा और भविष्य के सभी प्रोजेक्ट्स के लिए लागू होगा.

लद्दाख में सेना की मौजूदगी बढ़ी

चीन से तनातनी के बीच भारतीय सेना ने लद्दाख में अपनी मौजूदगी दोगुना बढ़ाई है. भारत को यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि चीन की सेना इस इलाके में वास्तविक स्थिति को बदलने की फिराक में है. सुरक्षा एजेंसियों की अलग-अलग समीक्षाओं में यह बात सामने आ चुकी है. सेना ने पूरे लद्दाख इलाके में 40 से 45 हजार जवानों की तैनाती की है. पहले यह तादाद 20 से 24 हजार हुआ करती थी. इसके अलावा भारतीय जमीन की सुरक्षा में भारत-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवानों की भी मौजूदगी बढ़ाई गई है. एक अधिकारी ने आजतक/इंडिया टुडे को बताया कि चीनी सैनिकों की संख्या भारत से कम है और यह तादाद तकरीबन 30-35 हजार के आसपास है.

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राजधानी दिल्ली में कोरोना का कहर तेजी से बढ़ता जा रहा है. जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस सब के चलते दिल्ली सरकार और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) आमने-सामने आ गए हैं. साथ ही ये भी बताते चलें कि अब आरडब्ल्यूए को लेकर दिल्ली सरकार भी सख्त हो गई है. सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली वासियों को आदेशों का सख्ती से पालन करवाने के निर्देश दिए गए हैं.

दिल्ली सरकार ने सभी डीएम और डीसीपी को आदेश दिया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की गाइडलाइन और दिल्ली सरकार के आदेशों का सख्ती से पालन करवाया जाए. दिल्ली सरकार ने कहा, ‘हमारी जानकारी में आया है कि जिन गतिविधियों की केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशानिर्देश के बाद हमने इजाजत दी थी, उनको अलग-अलग सरकारी एजेंसी और आरडब्ल्यूए लागू नहीं होने दे रही. यह दिशानिर्देशों और आदेशों का उल्लंघन है.’

इसके साथ ही अब सभी डीएम और दिल्ली पुलिस के डीसीपी को आदेश दिया गया है कि वह फील्ड के लोगों को अच्छी तरह से जानकारी दें और आदेश को पूरी तरह से लागू करवाएं. दरअसल कई जगह से खबरें आ रही थी कि दिल्ली सरकार के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासन, पुलिस या आरडब्लूए आदेशों को लागू नहीं होने दे रहे थे. जैसे घरों में काम करने वाली मेड को कुछ आरडब्लूए अपनी सोसायटी में नहीं घुसने दे रहे थे.

वहीं जिन आर्थिक गतिविधियों या औद्योगिक गतिविधियों की दिल्ली सरकार ने इजाजत दी थी, उसके लिए भी कई जगह से शिकायत आ रही थी. कहा जा रहा था कि पुलिस और प्रशासन औपचारिक इजाजत लेने के लिए कह रहे हैं जबकि आदेश थे कि किसी को अलग से कोई इजाजत लेने की जरूरत नहीं होगी।

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बीते दिनों कोरोना के डर से बीएमसी ने मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुंबई पुलिस के कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 55 साल से अधिक के पुलिसकर्मियों को घर पर रहने की गाइडलाइन जारी की थी. डायबटीज, शुगर, हाई ब्लड प्रेशर जैसे मेडिकल केस वाले पुलिस कर्मियों को घर पर रहने की एडवाइजरी दी गई थी. 50 साल से अधिक उम्र के पुलिस कर्मियों को फील्ड पर ना भेजकर पुलिस स्टेशन में काम दिया गया है. अब बीएमसी ने अपने कर्मचारियों के लिए नई नोटिस जारी की है,

जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस गाइडलाइन के मुताबिक बीएमसी के कर्मचारियों की हर महीने में 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की गई है. मुंबई महानगरपालिका कर्मचारियों को 75 प्रतिशत कामकाज के दिन में से 25 प्रतिशत काम उनके घर के नजदीक के बीएमसी ऑफिस में करना होगा. बीएमसी ने अभी कुछ दिन पहले 100 फीसदी कर दिया था लेकिन 100 फीसदी अटेंडेंस के चलते सोशल डिस्टनसिंग का पालन नहीं हो रहा था, इसलिए अभी 75 फीसदी अटेंडेन्स अनिवार्य कर दी है.

हालांकि बीएमसी में अपने कमर्चारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ अहम फैसले लिए हैं. बीएमसी ने नए नोटिफिकेशन के मुताबिक, जिन कर्मचारीयों की उम्र 55 से अधिक है और जिन्हें डायबटीज है, डायलेसिस की जरूरत और हाई ब्लड प्रेशर है, उनको 31 मई तक छुट्टी मिल सकती है. जिन कर्मचारियों की उम्र 55 से अधिक हो उन्हें ऑफिस ड्यूटी लगाई जाएगी. कोरोना वायरस से दूर सुरक्षित जगह का काम दिया जाएगा. इस कोरोना संकट के दौरान बीएमसी के क्लास चार के कर्मचारियों को हर दिन 300 रूपये का भत्ता भी दिया जाएगा. बीएमसी के दिव्यांग कर्मचारियों को 15 मई तक छुट्टी मिलेगी।

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इन दिनों बॉलीवुड एक्ट्रेस और पूर्व मिस वर्ल्ड प्रियंका चोपड़ा का एक पुराना वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है. जानकारी ते लिए आपको बता दें कि ये वीडियो साल 2000 का है जब प्रियंका मिस इंडिया पेजेंट में पहली रनर अप बनी थीं, जिसके बाद उन्होंने ये टाइटल भी अपने नाम किया था. बताते चलें कि प्रियंका की इस वायरल वीडियो में शाहरुख खान उनसे सवाल तक रहे हैं. इस वीडियो में शाहरुख, प्रियंका से उनकी शादी को लेकर सवाल करते नजर आ रहे हैं.

आपको बता दें कि बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने प्रियंका चोपड़ा को तीन विकल्प दिए हैं और उनसे पूछा है कि वो किससे शादी करना चाहेंगी. शाहरुख खान ने पहले विकल्प में कहा कि क्या वो किसी ऐसे स्पोर्ट्समैन से शादी करेंगी जिसके नाम कई बड़े रिकॉर्ड हों और उसने पूरी दुनिया में भारत का नाम रौशन किया हो. उनका दूसरा विकल्प एक नामी बिजनेसमैन था. उन्होंने कहा कि क्या वो किसी ऐसे नामी बिजनेसमैन से शादी करना चाहेंगी जो बेहद सफल है और आपको महंगे तोहफे और डायमेंड नेक्लेस दिला सके. तीसरे ऑप्शन में उन्होंने कहा कि क्या वो उनके जैसे किसी एक्टर के साथ शादी करना चाहेंगी.

शाहरुख खान के इस सवाल के जवाब में प्रियंका ने कहा कि वो इन तीनों में से स्पोर्ट्समैन का चुनाव करना चाहेंगी. उन्होंने कहा, ‘मैं एक स्पोर्ट्समैन के साथ शादी करना चाहूंगी. जिसने मेरे देश का नाम रौशन किया हो. जब मेरे हस्बैंड घर आएं तो मैं उन्हें बता सकूं कि मैं उन पर कितना मान करती हूं.” यहां आपको ये भी बता दें कि असल जीवन में प्रियंका चोपड़ा ने सिंगर एक्टर निक जोनास से शादी की है.

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कोरोना के कारण राजस्व में आई गिरावट के बाद राज्य सरकारें कुछ चीजों में इजाफा कर ही है. जानकारी के लिए आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा कर दिया गया है. साथ ही सरकार ने शराब के दाम भी बढ़ाए गए हैं. दोनों प्रस्ताव को योगी कैबिनेट ने बुधवार को पास कर दिया था और नई कीमतें तुरंत लागू भी कर दी गई हैं. योगी सरकार ने राज्य पर आई गिरावट को देखते हुए ये फैसला लिया है.

कोरोना के कारण पेट्रोल की कीमतों में 2 रुपये और डीजल की कीमतों में एक रुपये की बढ़ोतरी की गई है. अब प्रदेश में पेट्रोल की कीमत 73.91 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 71.91 रुपये थी. वहीं डीजल की कीमत 63.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 62.86 रुपये थी. वहीं, देसी शराब में 5 रुपये, अंग्रेजी शराब में 180 एमएल पर 10 रुपये, 180 एमएल से 500 एमएल तक 20 रुपये और 500 एमएल से ऊपर 30 रुपये की वृद्धि की गई है. सोमवार से ही यूपी में शराब की दुकानें खोली गई थी और पहले दिन करीब 100 करोड़ रुपये की शराब बिकी थी.

अकेले लखनऊ में सोमवार को 6.5 करोड़ की शराब बिकी थी. हालांकि, मंगलवार को शराब की दुकानों पर भीड़ कम देखी गई. नतीजा रहा कि लखनऊ में सोमवार के मुकाबले मंगलवार को 3.5 करोड़ की शराब बिकी. गाजियाबाद में शराब की दुकानें मंगलवार को खोली गई थीं और आज सुबह करीब सभी दुकानें स्टॉक न होने की वजह से बंद हो गईं. इससे पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर टैक्स बढ़ाया था. पेट्रोल पर प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की और डीजल पर 13 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. इसके साथ ही अब पंप मिलने वाले पेट्रोल डीजल पर टैक्स बढ़कर 69 फीसदी हो गया है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।

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देश भर में कोरोना वायरस को खतरा बढ़ता जा रहा है. ऐसे में इस संकट की मार सबसे ज्यादा महाराष्ट्र पर पड़ रही है. कोरोना की वजह से हुए लॉकडाउन और सबसे ज्यादा संक्रमित मरीजों के सामने आने के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंच रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए और सभी संकट से निपटने के लिए महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने अपने सभी बड़े खर्चों में कटौती का ऐलान किया है. साथ ही राज्य सरकार ने नई विकास परियोजनाओं और नई भर्तियों पर भी कुछ दिनों के लिए ब्रेक लगा दिया है.

उद्धव सरकार ने कोविड-19 संकट के चलते बने आर्थिक हालात से निपटने को लेकर महाराष्ट्र के लिए कुछ योजनाएं तैयार की हैं. राज्य सरकार ने खर्चों में कटौती के लिए कई प्रस्ताव दिए हैं. कोरोना संकट से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार जारी योजनाओं की समीक्षा कर रही है और प्राथमिकता के आधार यह तय कर रही है अमुक योजना चलेगी या अभी उसे स्थगित या रद्द किया जाएगा. जिन योजनाओं को कैंसिल करना होगा वो तमाम विभाग इसके बारे में राज्य सरकार को 31 मई तक जानकारी देंगे.

बजट का केवल 33% धन मिलेगा

तैयार प्रस्ताव के मुताबिक प्रत्येक विभाग को कुल बजटीय भत्ते का केवल 33% धन मिलेगा. प्रस्ताव में कहा गया है कि हरेक कार्यक्रम की समीक्षा की जानी चाहिए और केवल आवश्यक योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए. प्रस्ताव के मुताबिक नई योजनाओं पर कोई खर्च नहीं होगा. किन्हीं नई योजनाओं को भी प्रस्तावित नहीं किया जाएगा. यह उन योजनाओं पर भी लागू होगा जिन्हें मार्च 2020 तक कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया था. विभागों के व्यय की प्राथमिकता तय की गई है. इसके मुताबिक सार्वजनिक स्वास्थ्य, औषधि प्रशासन, राहत और पुनर्वास, खाद्य और नागरिक आपूर्ति सरकार की प्राथमिकता में रहेगी. हालांकि व्यय को केवल कोरोना एहतियाती और उपचार संबंधी परिचालन खर्चों पर ही सीमित रखा जाएगा.

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दुनियाभर में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 35 लाख 23 हजार 121 पहुंच गई है. अबतक इस जानलेवा महामारी से 2 लाख 47 हजार 753 लोगों की मौत हुई है. देश में अब तक कोरोना वायरस से मरीजों की संख्या 42000 के पार पहुंच चुकी है. वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अब तक देश में इसके 29453 केस सामने आ चुके हैं. साथ ही 1373 लोगों की इससे मौत हो चुकी है. इसमें से 11706 लोगों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा चुका है.

देश में कोरोना वायरस का खतरा दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है. इसे फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 22 मार्च से ही लॉकडाउन लागू कर रखा है. आप को बता दें कि आज लॉकडाउन का 41 दिनों हो गए है. देश में जारी लॉकडाउन की वजह से अलग-अलग हिस्सों में लोग फंसे हैं. इनमें काफी संख्या में श्रमिक भी हैं और लगातार घर जाने देने के लिए व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं. ऐसा ही एक मामला गुजरात के सूरत से सामने आ रहा है.

आपको बता दें कि पलसाना और पालनपुर में गुजरात के बाहर के राज्यों से आए श्रमिक घर जाने की मांग करते हुए सड़क पर आ गए है और इस दौरान उन्होंने जमकर हंगामा किया. इस को लेकर एक अधिकारी ने बताया कि अपने अपने गृह नगर लौटना चाह रहे सैकड़ों प्रवासी श्रमिकों की पुलिस के साथ झड़प हुई है. श्रमिकों ने पत्थर भी चलाए, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े. लॉकडाउन 3 में थोड़ी रियायत भी दी गई है और जगह-जगह फंसे लोगों को ले जाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन भी चलाई जा रही है.

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आज कोरोना योद्धाओं को देशभर में तीनों सेनाएं सम्मान कर रही हैं. आपको बता दें कि आज अस्पतालों के ऊपर हेलिकॉप्टर्स से फूल बरसाए जा रहे हैं. मुंबई और दिल्ली के ऊपर कोरोना वॉरियर्स को सम्मान देने के लिए सुखोई फाइटर जेट उड़े है, वहीं बात करें लेह की तो वहां चिनूक हेलिकॉप्टर ने फूल बरसाए गए. दिल्ली में सुपर हरक्यूलिस ने भी कोरोना वॉरियर्स को सलामी दी. आज तीनों सेनाएं ‘कोरोना योद्धाओं’ को उनकी सेवाओं के लिए आभार प्रकट कर रही हैं. देखें शानदार तस्वीरें.

कोरोना वायरस से निपटने में स्वास्थ्य कर्मियों की अहम भूमिका के मद्देनजर उनका सम्मान करने के लिए आज हेलिकॉप्टर ने अस्पतालों पर फूल बरसाए. भारतीय वायु सेना का सारंग हेलिकॉप्टर तिरुवनंतपुरम में सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जनरल अस्पताल के ऊपर से गुजरा. यह कोरोना वायरस महामारी से लड़ रहे डॉक्टरों, पैरामेडिकल कर्मियों, स्वच्छता कर्मचारियों और अन्य अग्रिम पंक्तियों के कर्मियों को सम्मानित करने के लिए सशस्त्र बलों की राष्ट्रव्यापी पहल का हिस्सा था.

दिल्ली के अलावा, भारतीय वायुसेना मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद, गुवाहाटी, पटना, लखनऊ, श्रीनगर, चंडीगढ़, भोपाल, हैदराबाद, बेंगलुरु, कोयंबटूर और तिरुवनंतपुरम समेत कई अन्य शहरों में भी फ्लाई पास्ट कर रही है. भारतीय नौसेना भी अपने अंदाज में इन कर्मवीरों को सलामी देंगे और दोपहर 3 बजे के बाद रोशन नजर आएंगे. हालांकि उनका सलामी देने का सिलसिला अभी से शुरू हो गया है. नेवी की ओर से बंगाल की खाड़ी में INS Jalashwa के जरिए कोरोना योद्धाओं सम्मान किया गया और अद्भुत अंदाज में Thank You लिखा गया.

INS Jalashwa जहाज का इस्तेमाल खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने में भी किया जा रहा है. सेना के बैंड भी देशभर में कोरोना वायरस मरीजों का इलाज कर रहे सिविल अस्पतालों के बाहर ‘‘देशभक्ति की धुन” बजा रहे हैं. भारतीय वायु सेना (IAF) ने दिल्ली में वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज, सफदरजंग हॉस्पिटल के ऊपर से फ्लाई पास्ट करते हुए फूल बरसा कर कोरोना वॉरियर्स के प्रति आभार व्यक्त किया

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बॉलीवुड एक्टर इरफान खान जो कि लंबे समय से कैंसर से जंग लड़ रहे थे, आज जिंदगी की जंग हार गए. मंगलवार को खबर सामने आई थी कि अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई जिसके चलते उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

इरफान की तबीयत काफी बिगड़ गई थी जिसके चलते उन्हें अस्पताल के आईसीयू वो आईसीयू में भर्ती थे. अब ये खबर सामने आई है कि उन्होंने जिंदगी की जंग हार गए और इस दुनिया को अलविदा कह दिया. इरफान खान की मौत की खबर सबसे की जानकारी फिल्म मेकर शूजित सरकार ने सबसे पहले दी. उन्होंने ट्वीट कर उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की.

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पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर जारी है.देश में महामारी कोरोना वायरस से संकट दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है. अब तक कोरोना वायरस से मरीजों की संख्या 28000 के पार पहुंच चुकी है. वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अब तक देश में इसके 28892 केस सामने आ चुके हैं. साथ ही 886 लोगों की इससे मौत हो चुकी है. इसमें से 6868 लोगों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा चुका है.

अब सवाल है कि क्या कोरोना वायरस संक्रमितों का इलाज प्लाज्मा थेरेपी से किया जा सकता है? इसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है. इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि प्लाज्मा थेरेपी को लेकर को मान्य थ्योरी अभी नहीं है. इसको लेकर अभी रिसर्च किया जा रहा है. प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल अगर गाइडलाइन के मुताबिक नहीं किया गया तो यह जान पर भी खतरा बन सकता है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा, ”प्लाज्मा थेरेपी पर काफी चर्चा हो रही है. COVID 19 के लिए देश में क्या दुनिया भर में कोई अप्रूव थेरेपी नहीं है. प्लाज्मा थेरेपी प्रायोगिक चरण में है, लेकिन अभी यह दावा करने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल कोविड-19 के इलाज के तौर पर किया जा सकता है . ICMR इसको लेकर स्टडी कर रही है. इसलिए जरूरी है कि जब तक ICMR स्टडी पूरा नहीं कर ले, तब तक इसका प्रयोग रिसर्च या ट्रायल के लिए ही करें. प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल अगर गाइडलाइन्स के मुताबिक नहीं करते हैं तो यह जान पर भी खतरा पैदा कर सकता है.” उन्होंने कहा, ”जब तक आईसीएमआर इसका सर्टिफिकेशन नहीं करता है तब तक इस थेरेपी का उपयोग गैर कानूनी है. इसको प्रयोग के तौर पर तो इस्तेमाल हो सकता है लेकिन उपचार के तौर पर नहीं.”

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